थोड़े हम, थोड़े तुम


छूठे हाथो में टूटे वादों में अधूरी बातों की पूरी यादों में थोड़े बिखरे हम , थोड़े तुम, अँधियारी शब में, बेचैनी बेहद मे, चलते क़दमों की बुझती आहट में खोये खोये हम, थोड़े तुम अनजान रास्तों में जागती नज़रों में, ढूँढे ना मिलते , अपने साये के पते , ये जो रात चुप है,…

तेरे आने से


सारे ग़मों के घर जो दिल में बने थे बिन कहे जो मन में रहे थे बिन रुके जो साँसों में चले थे, सारी सुर्ख हथेली जो ठंडी थी सर्द रात में जिसको गर्मी किसी के साथ की नहीं मिली थी जिसको चाहत किसी की याद की कभी रही थी तेरे आने से सब बदला…